नचणा ज़रुर चाहिदा

होया खुशियाँ दा आज वे माहोल,
नचणा ज़रुर चाहिदा,
साडी गुरा नाल बंधी हुई डोर,
नाचना जरुर चाहिदा…..

सोहना सोहना सतगुरु आसन लगाया मैं,
चुन चुन फुल्ला नाल उस नु सजाया मैं,
बड़ी शरदा नाल पुरे किते शोंक, सतगुरू घर आ गए,
ऐना वरगा ना कोई होर,
सतगुरु घर आ गए…..

सोणे हारावाले दी चाल निराली ऐ,
सिर ते रुमाल गल, फुल्ला वाली माला ऐ,
ऐदे दर्श पावा हाथ जोड़,
सतगुरु घर आ गए…..

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