बिनु गोपाल बैरिन भई कुंजैं।
तब ये लता लगति अति सीतल¸ अब भई विषम ज्वाल की पुंजैं।
बृथा बहति जमुना¸ खग बोलत¸ बृथा कमल फूलैं अलि गुंजैं।
पवन¸ पानी¸ धनसार¸ संजीवनि दधिसुत किरनभानु भई भुंजैं।
ये ऊधो कहियो माधव सों¸ बिरह करद करि मारत लुंजैं।
सूरदास प्रभु को मग जोवत¸ अंखियां भई बरन ज्यौं गुजैं।

Comments

संबंधित लेख

आगामी उपवास और त्यौहार

संकष्टी चतुर्थी

मंगलवार, 25 जून 2024

संकष्टी चतुर्थी
योगिनी एकादशी

मंगलवार, 02 जुलाई 2024

योगिनी एकादशी
मासिक शिवरात्रि

गुरूवार, 04 जुलाई 2024

मासिक शिवरात्रि
जगन्नाथ रथ यात्रा

रविवार, 07 जुलाई 2024

जगन्नाथ रथ यात्रा
गौरी व्रत

गुरूवार, 11 जुलाई 2024

गौरी व्रत
देवशयनी एकादशी

बुधवार, 17 जुलाई 2024

देवशयनी एकादशी

संग्रह