मधुबन में झूला झूल रहे राधेश्याम मदन मुरारी

मधुबन में झूला झूल रहे, राधेश्याम मदन मुरारी,
राधे श्याम मदन मुरारी राधे श्याम कुंज बिहारी,
मधुबन में झूला झूल रहे…..

मोर मुकुट कानों में कुंडल,
रूप निहारत सब ब्रजमंडल,
दर्शन कर सुद्ध बुद्ध भूल रहे, राधे संग कुंज बिहारी,
मधुबन में झूला झूल रहे…..

खड़ा मनसुखा लेकर सोटा,
सखियां दे रही लंबे झोटा,
अंबर में बादल झूम रहे, राधे श्याम कुंज बिहारी,
मधुबन में झूला झूल रहे…..

कूक रही है कोयल काली,
लता पता छाई हरियाली,
बागों में कलियां महक रही, राधे श्याम कुंज बिहारी,
मधुबन में झूला झूल रहे…..

प्रेमी ब्रिज लागे मनभावन,
रिमझिम रिमझिम बरसे सावन,
सब गोपी ग्वाला झूम रहे, राधे श्याम कुंज बिहारी,
मधुबन में झूला झूल रहे…..

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