मेरे कान्हा मैं निहारू तुझे

कान्हा मेरे.. कान्हा मेरे.. कान्हा..
कान्हा मेरे.. कान्हा मेरे.. कान्हा..
मैं निहारू तुझे जो सवारू तुझे,

मेरी आंखें ये कान्हा से हटती नहीं
मेरी आंखें ये कान्हा से हटती नहीं
तेरी बंसी की धुन पे नाचू होके मगन
मेरी भक्ति को दुनिया समझती नहीं
मेरी भक्ति को दुनिया समझती नहीं
हां, मैं पागल दीवानी श्याम दर्शन तेरा
बावरी हूं मैं कान्हा, तुम समर्पण मेरा
मेरे कान्हा.. मैं निहारू तुझे..
मेरे कान्हा.. मैं निहारू तुझे..
मैं निहारू तुझे…

चले जो हवाएं बोले, कान्हा कान्हा
बारिश की बूँदे बोले, कान्हा कान्हा
राधा जो पुकारे बोले, कान्हा कान्हा
कण-कण में वास तेरा, कान्हा कान्हा
चाह तेरी, राह मेरी.. कान्हा कान्हा
चाह तेरी, राह मेरी.. कान्हा कान्हा
मेरे कान्हा.. मैं निहारू तुझे..
मैं निहारूँ तुझे, जो संवारू तुझे
मेरी आंखें ये कान्हा से हटती नहीं

मेरी आंखें ये कान्हा से हटती नहीं

भूला हूआ था भटका हूआ था,
कान्हा तुमने संभाला।
सब ने नकारा तुमने संवारा,
तू ही है इक सहारा।

भूला हूआ था भटका हूआ था,
कान्हा तुमने संभाला।
सब ने नकारा तुमने संवारा,
तू ही है इक सहारा।

मेरी शुरुआत, मेरे कान्हा कान्हा।
मेरी पहचान, मेरे कान्हा कान्हा।
मेरी मुस्कान, मेरे कान्हा कान्हा।
बंसी की तान बोले, कान्हा कान्हा।
“स्वस्ति” पुकारे, आओ अब तो कान्हा।
हाँ.. हम सब पुकारे, आओ कान्हा कान्हा।

मेरे कान्हा.. मैं निहारू तुझे।
मेरे कान्हा.. मैं निहारू तुझे।।
मैं निहारू तुझे..

मेरे कान्हा की लीला निराली
बंसी बजाये कृष्ण मुरारी
वृन्दावन की कुञ्ज गलि में
गूंजे जय जय बाँके बिहारी..
कान्हा…कान्हा…कान्हा…

Author: Swasti Mehul

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