ओ कब जाऊंगा बृज़ धाम

श्री हरिदास
तरज़:-कोई बिछुड़ गया मिलके

ओ कब जाऊंगा बृज़ धाम,बृज़ धाम हां बृज़ धाम
ओ कब….

वृन्दावन की कुंज गलिंन में, यमुना तट और बन्सीं वट में
मिल जायें घनश्याम
ओ कब….

बरसानें की ऊंची अटारी,जहां बिराजे शामा
प्यारी पुराणों हो सब काम
ओ कब….

पागल मन की आस यही है,जीवन में बस प्यास यही है
धसका हो वहीं विश्राम
ओ कब…….।

Author: Unknown Claim credit

Comments

संबंधित लेख

आगामी उपवास और त्यौहार

वैशाखी पूर्णिमा

शुक्रवार, 01 मई 2026

वैशाखी पूर्णिमा
अपरा एकादशी

बुधवार, 13 मई 2026

अपरा एकादशी
शनि जयंती

शनिवार, 16 मई 2026

शनि जयंती
निर्जला एकादशी

गुरूवार, 25 जून 2026

निर्जला एकादशी
ज्येष्ठ पूर्णिमा

सोमवार, 29 जून 2026

ज्येष्ठ पूर्णिमा
योगिनी एकादशी

शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

योगिनी एकादशी

संग्रह