वृंदावन के कृष्ण मुरारी,
अब तो सुनलो अर्ज हमारी,
वृंदावन के कृष्ण मुरारी……..

द्वार पे तेरे कबसे पड़ा हूँ,
दोनों हाथ पसारे खड़ा हूँ,
अर्ज़ ये मेरी ना ठुकराना,
हे मनमोहन शरण पड़ा हूं,
लाखों की तुमने बिगड़ी सवारी
अबतो सुनलो अर्ज हमारी,
वृंदावन के कृष्ण मुरारी……..

श्याम प्यारी कुंज बिहारी जय जय श्री हरिदास
जन्म जन्म मोये दीजियो श्री वृंदावन बास

ठुकरा दोगे ऐसे प्यारे,
कहाँ जाएंगे दर से तुम्हारे,
तेरे सिवा अब कोन सुनेगा,
तुम ही प्राण हो श्याम हमारे,
तेरी ही होगी रुसवाई भारी,
अबतो सुनलो अर्जी हमारी,
वृंदावन के कृष्ण मुरारी……..

हाल में ऐसे कब तक रहेंगे,
बोलो ये गम कब तक सहेंगे,
दिल का हाल हम किस से कहेंगे,
कब तक मेरे आंसू बहेंगे,
दर्शन देदो मदन मुरारी,
अबतो सुनलो अर्जी हमारी,
वृंदावन के कृष्ण मुरारी……..

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