ज्योत जलती है तेरे भवन में,
माता रानी मैं आयी शरण में,
तेरी किरपा में खिले फूल मन में,
माता रानी मैं आयी शरण में…..

आस लगाए बैठे भक्त तुम्हारे,
दुःख और कष्ट दूर करो माँ हमारे,
भक्त चले है माँ तेरे भवन को,
माता रानी मैं आयी शरण में……

मन में लगी है दर्शन अभिलाषी,
तू मेरी मईया है, मैं हु तेरी दासी,
तेरा नाम तो बसा है कण कण में,
माता रानी मैं आयी शरण में…..

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