कैसे बनी कैसे बनी दुर्गा से काली कैसे बनी…..

काला चोला गोटा किनारी,
हाथों में तलवार निकाली,
रण में जाए मैया चीखन लगी, दुर्गा से काली ऐसी बनी….

मार-मार असुरों के मुंड ले आई,
उन मुंडो की माला बनाई,
माला पहन मैया नाचन लगी, दुर्गा से काली ऐसी बनी…..

मार-मार असुरों के हाथ ले आई,
उन हाथों के कंगन ले आई,
कंगना पहन मैया नाचन लगी, दुर्गा से काली ऐसेे बनी…..

मार-मार असुरों के खप्पर भर लाई,
उन खप्पर में मद्रा बनाई,
मदिरा पीकेे मैया झुमन लगी, दुर्गा से काली ऐसी बनी…..

तेरा यश वेदों ने गाया,
भक्तों ने कीर्तन में सुनाया,
जयकारों से गूंज उठी, दुर्गा से काली ऐसे बनी……

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