भजले हरी हरी सुन राजा भजले हरी हरी

भजले हरी हरी सुन राजा भजले हरी हरी

दो दिन के सब ठाठ है दो दिन की ये शान
भजले हरी हरी सुन राजा भजले हरी हरी…….

दाम बिना निर्धन दुखी तृष्णा वश धन वान
कहू न सुख संसार में सब जग देखा चान
भजले हरी हरी सुन राजा भजले हरी हरी…….

सर्व नाश के मूल है ये सब भोग विलास खारे पानी से भुजे कब अमृत की प्यास
भजले हरी हरी सुन राजा भजले हरी हरी…….

कल राजा कोई और था कल होगा कोई और सदा किसी के शीश पर कभी रहे न मान,
भजले हरी हरी सुन राजा भजले हरी हरी…….

कोई तेरे पाप का भाग न बाँटन हार पश्तायेगा मोत जब आएगी द्वार
भजले हरी हरी सुन राजा भजले हरी हरी…….

Author: Unknown Claim credit

Comments

संबंधित लेख

आगामी उपवास और त्यौहार

निर्जला एकादशी

गुरूवार, 25 जून 2026

निर्जला एकादशी
ज्येष्ठ पूर्णिमा

सोमवार, 29 जून 2026

ज्येष्ठ पूर्णिमा
योगिनी एकादशी

शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

योगिनी एकादशी
देवशयनी एकादशी

शनिवार, 25 जुलाई 2026

देवशयनी एकादशी
गुरु पूर्णिमा

बुधवार, 29 जुलाई 2026

गुरु पूर्णिमा
आषाढ़ पूर्णिमा

बुधवार, 29 जुलाई 2026

आषाढ़ पूर्णिमा

संग्रह