फाग खेलन बरसाने आए हैं नटवर नंद किशोर,
नटवर नंद किशोर सखी री छलिया नवल किशोर,
फाग खेलन बरसाने आए हैं….

घेर लई सब रंग रंगीली,
छाए रही छवि छटा छबीली,
सब ढोल मृदंग बजाए हैं रसिया नवल किशोर,
फाग खेलन बरसाने आए हैं नटवर नंद किशोर…..

केसर रंग मले गालन पे,
रंग गुलाल भरे बालन में,
अरे इसने हरियल बांस मंगाए हैं नटवर नंद किशोर,
फाग खेलन बरसाने आए हैं नटवर नंद किशोर……

जुड़ मिल के सब सखियां आई,
अमर घटा अंबर में छाई,
जिसने अमीर गुलाल उड़ाए हैं रसिया नवल किशोर,
फाग खेलन बरसाने आए हैं नटवर नंद किशोर…….

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