सावन की रुत है आजा माँ

सावन की रुत है आजा माँ

सावन की रुत है आजा माँ,हम झूला तुझे झुलाये गे,
फूलो से सजाये गे तुझको मेहँदी हाथो में लगाएंगे,

कोई भेट करे गा चुनरी कोई पहनायेगा चूड़ी,
माथे पे लगाएगा माँ कोई भक्त तिलक सिंदूरी,
कोई लिए खड़ा है पायल लाया है कोई कंगना,
जिन राहो से आएंगे माँ तू भक्तो के अंगना,
हम पलके वहा विशायेगे,
सावन की रुत है आजा माँ,

माँ अम्बा की डाली पे झूला भक्तो ने सजाया,
चन्दन की विशाई चौंकी श्रदा से तुझे भुलाया,
अब छोड़ दे आँख मचोली आजा ओ मैया भोली,
हम तरस रहे है कब से सुन ने को तेरी बोली,
सावन की रुत है आजा माँ,

लाखो हो रूप माँ तेरे चाहे जिस रूप में आजा,
नैनो की प्यास भुजा जा बस इक झलक दिखला जा,
झूले पे तुझे बिठा के तुझे दिल का हाल सुना के,
फिर मेवे और मिश्री का तुझे प्रेम से भोग लगा के,
तेरे भवन पे दौड़ के आएंगे ,
सावन की रुत है आजा माँ,

Author: Guru Ashish

Comments

संबंधित लेख

आगामी उपवास और त्यौहार

वैशाखी पूर्णिमा

शुक्रवार, 01 मई 2026

वैशाखी पूर्णिमा
अपरा एकादशी

बुधवार, 13 मई 2026

अपरा एकादशी
शनि जयंती

शनिवार, 16 मई 2026

शनि जयंती
निर्जला एकादशी

गुरूवार, 25 जून 2026

निर्जला एकादशी
ज्येष्ठ पूर्णिमा

सोमवार, 29 जून 2026

ज्येष्ठ पूर्णिमा
योगिनी एकादशी

शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

योगिनी एकादशी

संग्रह