मैं लगूं प्यारी या बांसुरी है प्यारी

पूछ रही राधा बताओ गिरधारी,
मैं लगूं प्यारी या बांसुरी है प्यारी,
पूछ रही राधा बताओ गिरधारी…..

मधुबन में तूने बांसुरी बजाई,
सब सखियां घर घर से बुलाई,
सखियों की यारी लगे तुमको प्यारी,
मैं लगूं प्यारी या बांसुरी है प्यारी…..

गोकुल में छुप छुप के माखन चुराए,
ग्वाल वालों संग बांट बांट खाएं,
अच्छी लगे तोहे ग्वालो की यारी,
मैं लगूं प्यारी या बांसुरी है प्यारी…..

सारा ब्रिज ढूंढा वृंदावन में छुप गए,
हमसे क्यों रहते हो दूर दूर हट के,
दर्शन को प्यासी हैं अखियां हमारी,
मैं लगूं प्यारी है बांसुरी है प्यारी…..

जमुना तट पर चीर चुराए,
कदम डाल पर चढ़कर दिखाएं,
सखियों को भावे शरारत तुम्हारी,
मैं लगूं प्यारी या बांसुरी है प्यारी…..

निधिवन में कान्हा रास रचाए,
खुद नाचे और सबको नचाए,
हमको क्यों भूल गए गिरधारी,
मैं लगूं प्यारी या बांसुरी है प्यारी……

Author: Unknown Claim credit

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