हरि नाम धन बांटिए,
हरि नाम धन सिंचिये,
हरि नाम धन चाखिये,
हरि नाम धन लीजिए….

सबसे ऊंचा नाम हरि का,
इससे ऊंचा और नहीं,
माया को तो चोर लागे,
इस धन को चोर नहीं,
हरि नाम धन बांटिए,
हरि नाम धन सिंचिये,
हरि नाम धन चाखिये,
हरि नाम धन लीजिए…..

शामों सुबहा ध्यान हरि का,
थामे अपनी डोर वही,
हरि प्रेम चखा हो जिसने,
भाए कुछ भी और नहीं,
हरि नाम धन बांटिए,
हरि नाम धन सिंचिये,
हरि नाम धन चाखिये,
हरि नाम धन लीजिए…..

हरि नाम धन ऐसो धन,
जो बांटे सो गुना बढ़ जाये,
जो रिताने तुम चलो,
ये धन रीत ही ना पाए,
हरि नाम धन बांटिए,
हरि नाम धन सिंचिये,
हरि नाम धन चाखिये,
हरि नाम धन लीजिए……

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