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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas
भगवान कुबेर

भगवान कुबेर

Lord Kubera

कुबेर जी का मूल मंत्र

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा

कुबेर चालीसा

कुबेर मंत्र

कुबेर जी के व्रत और त्योहार

भगवान कुबेर – परिचय

भगवान कुबेर धन के देवता, देवताओं के कोषाध्यक्ष और यक्षों के राजा हैं। वे उत्तर दिशा के दिक्पाल (रक्षक) हैं, इसीलिए वास्तु में तिजोरी और धन रखने की जगह उत्तर दिशा में बनाने की सलाह दी जाती है। जहाँ माता लक्ष्मी धन देती हैं, वहीं कुबेर उस धन की रक्षा करते हैं और उसे स्थिर रखते हैं। इसलिए धनतेरस और दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश के साथ कुबेर की भी पूजा होती है।

कुबेर का परिवार और रावण से संबंध

कुबेर ऋषि विश्रवा और इलविडा के पुत्र तथा ऋषि पुलस्त्य के पौत्र हैं। पिता के नाम पर उन्हें वैश्रवण कहा जाता है। विश्रवा की दूसरी पत्नी कैकसी से रावण, कुंभकर्ण और विभीषण का जन्म हुआ – यानी रावण कुबेर का सौतेला भाई था।

वाल्मीकि रामायण के अनुसार कुबेर ने कठोर तप से ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया और धनपति का पद तथा पुष्पक विमान पाया। वे सोने की लंका में रहते थे, जिसे विश्वकर्मा ने बनाया था। बाद में रावण ने कुबेर को हराकर लंका और पुष्पक विमान छीन लिया। तब कुबेर कैलाश के पास अलकापुरी में बस गए और भगवान शिव के मित्र और भक्त बने।

कुबेर का स्वरूप

कुबेर को छोटे कद, बड़े पेट और रत्नों से सजे रूप में दिखाया जाता है। उनके हाथ में गदा और धन का घड़ा रहता है, और साथ में एक नेवला होता है जो मुँह से रत्न उगलता है – यह धन की कभी न खत्म होने वाली धारा का प्रतीक है। उनका वाहन नर (मनुष्य) है, इसलिए उन्हें “नरवाहन” कहते हैं।

तिरुपति बालाजी और कुबेर का ऋण

एक लोक कथा के अनुसार भगवान वेंकटेश्वर (विष्णु) ने पद्मावती से विवाह के लिए कुबेर से बहुत बड़ा ऋण लिया था। मान्यता है कि भक्तों का चढ़ावा आज भी उसी ऋण का ब्याज चुकाने में जाता है, और यह ऋण कलियुग के अंत तक चलेगा।

धनतेरस पर कुबेर पूजा विधि

  1. धनतेरस या दीपावली की शाम को घर के उत्तर भाग में चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएँ।
  2. कुबेर जी की प्रतिमा, चित्र या कुबेर यंत्र स्थापित करें; साथ में तिजोरी या धन की पोटली रखें।
  3. रोली, अक्षत, पीले फूल और धनिया के बीज चढ़ाएँ; खीर या मिठाई का भोग लगाएँ।
  4. “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा” का 108 बार जाप करें।
  5. कुबेर चालीसा पढ़ें और लक्ष्मी-गणेश की आरती के साथ पूजा पूरी करें।

कुबेर कृपा के लिए अच्छी आदतें

  • घर का उत्तर भाग साफ़ और हल्का रखें; वहाँ भारी सामान या कूड़ा न रखें।
  • धन का सम्मान करें – पैसे ज़मीन पर न फेंकें, बटुआ साफ़ रखें।
  • ईमानदारी से कमाएँ, बचत करें और दान करें – कुबेर धन के रक्षक हैं, फ़िज़ूलख़र्ची के नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भगवान कुबेर कौन हैं?
भगवान कुबेर धन के देवता, देवताओं के कोषाध्यक्ष, यक्षों के राजा और उत्तर दिशा के दिक्पाल हैं।
कुबेर और रावण का क्या संबंध है?
कुबेर और रावण दोनों ऋषि विश्रवा के पुत्र थे, पर माताएँ अलग थीं। इसलिए रावण कुबेर का सौतेला भाई था। रावण ने कुबेर से लंका और पुष्पक विमान छीन लिया था।
कुबेर की पूजा कब करनी चाहिए?
धनतेरस और दीपावली पर कुबेर पूजा का विशेष महत्व है। शुक्रवार को भी लक्ष्मी जी के साथ कुबेर की पूजा की जा सकती है।
कुबेर का मंत्र क्या है?
कुबेर मंत्र है – "ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा"।
कुबेर की दिशा कौन सी है?
कुबेर उत्तर दिशा के स्वामी हैं। इसलिए वास्तु में तिजोरी और धन रखने का स्थान उत्तर दिशा में शुभ माना जाता है।

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