वैष्णो देवी जी का मूल मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
जय माता दी
वैष्णो देवी जी की आरती
वैष्णो देवी चालीसा
वैष्णो देवी जी के भजन
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माँ वैष्णो रानी आ गयी तारेया दिया छावा Ma vaishno rani aa gayi tareyan diya chhavan माता जी
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कितना पावन सुंदर मैया वैष्णो तेरा धाम रे kitna pawan sundar maiya vaishno dhaam re माता जी
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धन दुर्गे मां वैष्णो dhan durge maa vaishno माता जी
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माता वैष्णो दे आये नवरात्रे mata vaishno de aaye navratre माता जी
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जम्मू से आजा मेरी वैष्णो देवी मईया jammu se aaja meri vaishno devi mayia माता जी
वैष्णो देवी जी के व्रत और त्योहार
माता वैष्णो देवी – परिचय
माता वैष्णो देवी जम्मू-कश्मीर के त्रिकूट पर्वत पर विराजमान आदिशक्ति का रूप हैं, जिन्हें भक्त प्यार से माता रानी कहते हैं। उनके भवन की पवित्र गुफा में कोई मूर्ति नहीं, बल्कि तीन प्राकृतिक पिंडियाँ हैं – महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती। हर साल करोड़ों श्रद्धालु “जय माता दी” का जयकारा लगाते हुए कटरा से भवन तक की पैदल यात्रा करते हैं। माना जाता है कि माता का बुलावा आने पर ही उनके दर्शन होते हैं।
वैष्णो देवी की कथा
लोक कथा के अनुसार माता ने दक्षिण भारत में रत्नाकर सागर के घर एक कन्या के रूप में जन्म लिया। बचपन से ही वे भगवान विष्णु की भक्त थीं, इसलिए उनका नाम वैष्णवी पड़ा। उन्होंने भगवान राम को पति रूप में पाने के लिए तप किया। राम ने कहा कि कलियुग में वे कल्कि रूप में आकर उनसे विवाह करेंगे, तब तक वे त्रिकूट पर्वत पर तप करें और भक्तों का कल्याण करें।
भैरवनाथ और अर्धकुंवारी
माता के भक्त पंडित श्रीधर के भंडारे में तांत्रिक भैरवनाथ आया, जिसने कन्या रूपी माता को पकड़ना चाहा। माता त्रिकूट पर्वत की ओर चली गईं। रास्ते में उन्होंने एक गुफा में नौ महीने तप किया – इसे अर्धकुंवारी या गर्भजून गुफा कहते हैं। भैरव पीछा करते हुए पहुँचा तो माता ने भवन की गुफा के पास महाकाली रूप में उसका सिर काट दिया। सिर दूर पहाड़ी पर जाकर गिरा। अंत समय में भैरव ने क्षमा माँगी तो माता ने वरदान दिया कि उनके दर्शन के बाद भैरव के दर्शन किए बिना यात्रा पूरी नहीं होगी। आज वहीं भैरव मंदिर है। काल भैरव के बारे में भी पढ़ें।
वैष्णो देवी यात्रा मार्ग
- कटरा – यात्रा का आधार शिविर; यहाँ से यात्रा पर्ची (RFID कार्ड) लेना ज़रूरी है। कटरा तक रेल और सड़क दोनों से पहुँच सकते हैं।
- बाणगंगा – कथा के अनुसार माता ने यहाँ बाण चलाकर जलधारा निकाली थी।
- चरण पादुका और अर्धकुंवारी – यात्रा का लगभग बीच का पड़ाव।
- भवन – पवित्र गुफा, कटरा से लगभग 12–13 किमी की चढ़ाई। पैदल, घोड़े, पालकी, बैटरी कार (अर्धकुंवारी से) और हेलीकॉप्टर (कटरा से सांझीछत) की सुविधा है।
- भैरव मंदिर – भवन से लगभग 2–3 किमी ऊपर; रोपवे भी चलता है।
यात्रा के नियम, समय और बुकिंग बदलती रहती है, इसलिए जाने से पहले श्राइन बोर्ड की आधिकारिक जानकारी देख लें।
घर पर वैष्णो माता की पूजा
- मंगलवार, शुक्रवार या नवरात्रि में स्नान कर माता की तस्वीर के सामने लाल चुनरी बिछाएँ।
- घी का दीपक जलाएँ, लाल फूल, रोली, अक्षत और नारियल चढ़ाएँ।
- हलवा-पूरी और चने का भोग लगाएँ – यह कन्या पूजन का भी प्रसाद है।
- नवार्ण मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का जाप करें।
- वैष्णो देवी चालीसा पढ़ें और वैष्णो देवी की आरती करें।
चैत्र नवरात्रि और शरद नवरात्रि में भवन पर विशेष उत्सव होता है। माता के अन्य रूपों के लिए देवी दुर्गा का पेज देखें।