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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas
माता वैष्णो देवी

माता वैष्णो देवी

Mata Vaishno Devi

वैष्णो देवी जी का मूल मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

जय माता दी

वैष्णो देवी जी की आरती

वैष्णो देवी चालीसा

वैष्णो देवी जी के भजन

वैष्णो देवी जी के व्रत और त्योहार

माता वैष्णो देवी – परिचय

माता वैष्णो देवी जम्मू-कश्मीर के त्रिकूट पर्वत पर विराजमान आदिशक्ति का रूप हैं, जिन्हें भक्त प्यार से माता रानी कहते हैं। उनके भवन की पवित्र गुफा में कोई मूर्ति नहीं, बल्कि तीन प्राकृतिक पिंडियाँ हैं – महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती। हर साल करोड़ों श्रद्धालु “जय माता दी” का जयकारा लगाते हुए कटरा से भवन तक की पैदल यात्रा करते हैं। माना जाता है कि माता का बुलावा आने पर ही उनके दर्शन होते हैं।

वैष्णो देवी की कथा

लोक कथा के अनुसार माता ने दक्षिण भारत में रत्नाकर सागर के घर एक कन्या के रूप में जन्म लिया। बचपन से ही वे भगवान विष्णु की भक्त थीं, इसलिए उनका नाम वैष्णवी पड़ा। उन्होंने भगवान राम को पति रूप में पाने के लिए तप किया। राम ने कहा कि कलियुग में वे कल्कि रूप में आकर उनसे विवाह करेंगे, तब तक वे त्रिकूट पर्वत पर तप करें और भक्तों का कल्याण करें।

भैरवनाथ और अर्धकुंवारी

माता के भक्त पंडित श्रीधर के भंडारे में तांत्रिक भैरवनाथ आया, जिसने कन्या रूपी माता को पकड़ना चाहा। माता त्रिकूट पर्वत की ओर चली गईं। रास्ते में उन्होंने एक गुफा में नौ महीने तप किया – इसे अर्धकुंवारी या गर्भजून गुफा कहते हैं। भैरव पीछा करते हुए पहुँचा तो माता ने भवन की गुफा के पास महाकाली रूप में उसका सिर काट दिया। सिर दूर पहाड़ी पर जाकर गिरा। अंत समय में भैरव ने क्षमा माँगी तो माता ने वरदान दिया कि उनके दर्शन के बाद भैरव के दर्शन किए बिना यात्रा पूरी नहीं होगी। आज वहीं भैरव मंदिर है। काल भैरव के बारे में भी पढ़ें।

वैष्णो देवी यात्रा मार्ग

  • कटरा – यात्रा का आधार शिविर; यहाँ से यात्रा पर्ची (RFID कार्ड) लेना ज़रूरी है। कटरा तक रेल और सड़क दोनों से पहुँच सकते हैं।
  • बाणगंगा – कथा के अनुसार माता ने यहाँ बाण चलाकर जलधारा निकाली थी।
  • चरण पादुका और अर्धकुंवारी – यात्रा का लगभग बीच का पड़ाव।
  • भवन – पवित्र गुफा, कटरा से लगभग 12–13 किमी की चढ़ाई। पैदल, घोड़े, पालकी, बैटरी कार (अर्धकुंवारी से) और हेलीकॉप्टर (कटरा से सांझीछत) की सुविधा है।
  • भैरव मंदिर – भवन से लगभग 2–3 किमी ऊपर; रोपवे भी चलता है।

यात्रा के नियम, समय और बुकिंग बदलती रहती है, इसलिए जाने से पहले श्राइन बोर्ड की आधिकारिक जानकारी देख लें।

घर पर वैष्णो माता की पूजा

  1. मंगलवार, शुक्रवार या नवरात्रि में स्नान कर माता की तस्वीर के सामने लाल चुनरी बिछाएँ।
  2. घी का दीपक जलाएँ, लाल फूल, रोली, अक्षत और नारियल चढ़ाएँ।
  3. हलवा-पूरी और चने का भोग लगाएँ – यह कन्या पूजन का भी प्रसाद है।
  4. नवार्ण मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का जाप करें।
  5. वैष्णो देवी चालीसा पढ़ें और वैष्णो देवी की आरती करें।

चैत्र नवरात्रि और शरद नवरात्रि में भवन पर विशेष उत्सव होता है। माता के अन्य रूपों के लिए देवी दुर्गा का पेज देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वैष्णो देवी की गुफा में किसकी पूजा होती है?
वैष्णो देवी की पवित्र गुफा में तीन प्राकृतिक पिंडियों की पूजा होती है – महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती। वहाँ कोई मूर्ति नहीं है।
वैष्णो देवी के बाद भैरव मंदिर क्यों जाते हैं?
मान्यता है कि माता ने भैरवनाथ का वध करने के बाद उसे वरदान दिया कि माता के दर्शन के बाद भैरव के दर्शन किए बिना यात्रा पूरी नहीं मानी जाएगी।
कटरा से वैष्णो देवी भवन कितनी दूर है?
कटरा से भवन तक पैदल रास्ता लगभग 12–13 किलोमीटर है। घोड़े, पालकी, बैटरी कार और हेलीकॉप्टर की सुविधा भी है।
अर्धकुंवारी गुफा का क्या महत्व है?
मान्यता है कि भैरवनाथ से बचकर माता ने इस गुफा में नौ महीने तप किया था। इसे गर्भजून गुफा भी कहते हैं।
वैष्णो देवी का मंत्र क्या है?
माता की पूजा में नवार्ण मंत्र "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" का जाप किया जाता है। भक्त "जय माता दी" का जयकारा लगाते हैं।

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