सीता जी की आरती
सीता जी के भजन
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सीता की लेने खबरिया चले लंका नगरिया sita ki lene khabariya chale lanka nagariya हनुमान ▶ वीडियो
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सीता राम जी की प्यारी राजधानी लागे Sita Ram Ji Ki Pyari Rajdhani Lage
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श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने मे भजन Shri Ram Janaki Baithe Hain Mere Sine Me Bhajan
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राम लक्ष्मण के संग जानकी ram lakshman ke sang janki हनुमान
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सीता राम दरश रस बरसें sita ram darsh ras barse
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जनक दुलारी के जानकी प्यारी के मन में बसे श्री राम janak dulari ke janki pyari ke man me base shri ram
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आओ बसाये मन मंदिर में झांकी सीताराम की aao basaye man mandir me jhanki sitaram ki
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अरे मन भज ले सीताराम are man bhaj le sitaram
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राम जानकी मंदिर ram janki mandir
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तबमें जानकीनाथ कहो tabmein janakinath kaho कृष्ण जी
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ऋषि वाल्मीकि की कुटिया में एक सीता प्यारी रहती हैं rishi valmiki ki kutiya me ek sita pyari rehti hai गुरुदेव
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राम लक्ष्मण के संग जानकी, जय बोलो हनुमान की Ram Lakshman Janki Jay Bolo Hanuman Ki हनुमान
सीता जी के व्रत और त्योहार
सीता जी के प्रसिद्ध मंदिर
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अयोध्या, उत्तर प्रदेश श्री रामस्वामी मंदिर (अम्माजी मंदिर), अयोध्या भगवान श्रीराम (चक्रवर्ती तिरुमगन), देवी सीता
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तिरुपति, आंध्र प्रदेश श्री कोदंडराम स्वामी मंदिर, तिरुपति भगवान श्री कोदंडराम (श्रीराम), देवी सीता और लक्ष्मण
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Motihari, बिहार विराट रामायण मंदिर (निर्माणाधीन), कैथवलिया, पूर्वी चंपारण श्रीराम और माता सीता (प्रस्तावित मुख्य विग्रह); शिव मंडप में सहस्रलिंगम महादेव
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Raipur, छत्तीसगढ़ दूधाधारी मठ एवं मंदिर, रायपुर हनुमान जी (मठ के अधिष्ठाता), भगवान राम-जानकी और श्री बालाजी
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Ahmedabad, गुजरात अहमदाबाद काली बाड़ी (माँ काली मंदिर), अहमदाबाद माँ काली (साथ में शिव, राम-सीता, हनुमान और श्रीकृष्ण)
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पूर्वी दिल्ली, दिल्ली स्वामीनारायण अक्षरधाम, दिल्ली भगवान स्वामीनारायण; साथ में सीता-राम, राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती और लक्ष्मी-नारायण
देवी सीता – परिचय
देवी सीता
देवी सीता रामायण और रामकथा पर आधारित अन्य ग्रंथ, जैसे रामचरितमानस, कंब रामायण की मुख्य नायिका हैं । सीता मिथिला(सीतामढ़ी, बिहार) में जन्मी थी, यह स्थान आगे चलकर सीतामढ़ी से विख्यात हुआ। देवी सीता मिथिला के नरेश राजा जनक की ज्येष्ठ पुत्री थीं । इनका विवाह अयोध्या के नरेश राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र श्री राम से स्वयंवर में शिवधनुष को भंग करने के उपरांत हुआ था। इन्होंने स्त्री व पतिव्रता धर्म का पूर्ण रूप से पालन किया था जिसके कारण इनका नाम बहुत आदर से लिया जाता है। त्रेतायुग में इन्हें सौभाग्य की देवी लक्ष्मी का अवतार कहा गया है।