मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas
माता गंगा

माता गंगा

Goddess Ganga

गंगा जी का मूल मंत्र

ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः

गंगा जी की आरती

गंगा चालीसा

गंगा जी के भजन

गंगा जी के व्रत और त्योहार

गंगा जी के प्रसिद्ध मंदिर

माता गंगा – परिचय

गंगा माता हिंदू धर्म की सबसे पवित्र नदी और देवी हैं। मान्यता है कि गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरीं ताकि मनुष्यों के पाप धो सकें और पूर्वजों को मोक्ष दे सकें। गंगोत्री से निकलकर हरिद्वार, प्रयागराज और काशी होते हुए गंगा सागर तक बहने वाली गंगा के तट पर ही भारत की प्राचीन सभ्यता और तीर्थ बसे हैं। गंगाजल को इतना पवित्र माना जाता है कि हर पूजा, संस्कार और अंतिम समय में इसका प्रयोग होता है।

गंगा अवतरण – भगीरथ की तपस्या की कथा

वाल्मीकि रामायण के अनुसार अयोध्या के राजा सगर के साठ हज़ार पुत्र कपिल मुनि के क्रोध से भस्म हो गए थे। उन्हें मोक्ष तभी मिल सकता था जब स्वर्ग की गंगा उनकी राख को छू ले। सगर के वंशज भगीरथ ने हज़ारों वर्ष कठोर तप किया। ब्रह्मा जी गंगा को धरती पर भेजने को तैयार हुए, पर गंगा का वेग इतना प्रचंड था कि धरती उसे सह न पाती।

तब भगीरथ ने भगवान शिव की तपस्या की। शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर लिया और फिर एक धारा धीरे से धरती पर छोड़ी। भगीरथ के रथ के पीछे-पीछे गंगा बहती हुई गंगा सागर पहुँचीं और सगर पुत्रों का उद्धार हुआ। इसीलिए गंगा को भागीरथी कहा जाता है, और कठिन प्रयास को आज भी “भगीरथ प्रयास” कहते हैं।

जाह्नवी नाम की कथा

धरती पर आते समय गंगा की धारा ने ऋषि जह्नु का आश्रम बहा दिया। क्रोधित ऋषि ने पूरी गंगा पी ली। भगीरथ की प्रार्थना पर उन्होंने गंगा को अपने कान से बाहर निकाला। इसलिए गंगा को जह्नु की पुत्री जाह्नवी भी कहते हैं। यह घटना वैशाख शुक्ल सप्तमी को हुई मानी जाती है, जिसे गंगा सप्तमी के रूप में मनाते हैं।

गंगा और महाभारत

महाभारत में गंगा ने राजा शांतनु से विवाह किया और आठ पुत्रों को जन्म दिया, जो शापित आठ वसु थे। सात को उन्होंने जन्म लेते ही गंगा में प्रवाहित कर शाप से मुक्त किया। आठवें पुत्र देवव्रत को शांतनु ने रोक लिया – यही आगे चलकर भीष्म पितामह बने।

गंगा दशहरा और गंगा स्नान

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा के धरती पर अवतरण का पर्व गंगा दशहरा मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान से दस प्रकार के पाप नष्ट होते हैं। कार्तिक पूर्णिमा, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और कुंभ के समय गंगा स्नान का विशेष महत्व है। हरिद्वार में हर की पौड़ी और काशी में दशाश्वमेध घाट की संध्या गंगा आरती दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

गंगा पूजा विधि

  1. संभव हो तो गंगा तट पर, वरना घर में स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  2. स्नान करते समय “गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥” मंत्र पढ़ें।
  3. गंगा माता की तस्वीर या गंगाजल के कलश के सामने दीपक जलाएँ, फूल और अक्षत चढ़ाएँ।
  4. “ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः” का जाप करें।
  5. गंगा चालीसा पढ़ें और गंगा जी की आरती करें। गंगा तट पर हों तो दीपदान करें।

गंगा को स्वच्छ रखना भी पूजा है

गंगा माँ की सच्ची भक्ति उन्हें स्वच्छ रखने में है। पूजा सामग्री, प्लास्टिक और फूल-मालाएँ नदी में न डालें; उनके लिए घाटों पर बने कलश या कुंड का प्रयोग करें। दीपदान के लिए आटे या पत्तों के दीये उपयोग करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गंगा धरती पर कैसे आईं?
राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों (सगर के साठ हज़ार पुत्रों) के उद्धार के लिए कठोर तप किया। ब्रह्मा जी ने गंगा को भेजा और भगवान शिव ने उनका वेग अपनी जटाओं में धारण कर धीरे से धरती पर छोड़ा।
गंगा को भागीरथी और जाह्नवी क्यों कहते हैं?
भगीरथ के तप से धरती पर आने के कारण गंगा भागीरथी कहलाईं। ऋषि जह्नु ने उन्हें पीकर अपने कान से निकाला था, इसलिए उनका नाम जाह्नवी पड़ा।
गंगा दशहरा कब मनाया जाता है?
गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है। इस दिन गंगा का धरती पर अवतरण हुआ माना जाता है।
गंगा माता का वाहन क्या है?
गंगा माता का वाहन मकर (मगरमच्छ जैसा जलचर) है। उनके हाथों में कलश और कमल दिखाए जाते हैं।
घर पर गंगा स्नान का पुण्य कैसे मिले?
नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर "गंगे च यमुने चैव…" मंत्र पढ़ते हुए स्नान करने से घर पर ही गंगा स्नान का पुण्य माना जाता है।

गंगा जी की भक्ति साझा करें

WhatsApp Facebook