खाटू श्याम जी का मूल मंत्र
ॐ श्री श्याम देवाय नमः
खाटू श्याम जी की आरती
खाटू श्याम चालीसा
खाटू श्याम मंत्र
खाटू श्याम जी के भजन
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खाटू श्याम जी के व्रत और त्योहार
खाटू श्याम – परिचय
खाटू श्याम जी कलियुग के सबसे लोकप्रिय देवताओं में से हैं। राजस्थान के सीकर ज़िले के खाटू गाँव में उनका प्रसिद्ध मंदिर है, जहाँ हर साल लाखों भक्त पैदल निशान लेकर पहुँचते हैं। मान्यता है कि खाटू श्याम महाभारत के वीर बर्बरीक हैं, जिन्हें भगवान श्रीकृष्ण ने अपना नाम “श्याम” दिया और वरदान दिया कि कलियुग में वे उन्हीं के रूप में पूजे जाएँगे। इसीलिए भक्त उन्हें “हारे का सहारा” कहते हैं – जो हर ओर से हार चुका हो, उसका सहारा।
बर्बरीक से खाटू श्याम बनने की कथा
बर्बरीक पांडव भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। उनकी माता मोरवी (कामकटंकटा) ने उन्हें युद्धकला सिखाई। देवी की तपस्या से उन्हें तीन अचूक बाण मिले – पहला बाण लक्ष्यों को चिह्नित करता, दूसरा उन्हें बचाता या नष्ट करता और तीसरा सब कुछ समाप्त कर तरकश में लौट आता। इसीलिए उन्हें “तीन बाणधारी” कहा जाता है।
जब कुरुक्षेत्र का युद्ध शुरू होने वाला था, बर्बरीक ने माता को वचन दिया था कि वे हारने वाले पक्ष की ओर से लड़ेंगे। श्रीकृष्ण जानते थे कि ऐसा होने पर युद्ध कभी समाप्त नहीं होगा, क्योंकि वे बार-बार पक्ष बदलते रहेंगे। ब्राह्मण का रूप धरकर श्रीकृष्ण ने उनसे दान माँगा, और बर्बरीक ने बिना हिचक अपना शीश दान कर दिया। इसी से वे “शीश के दानी” कहलाए। उनकी इच्छा पर श्रीकृष्ण ने उनका शीश एक ऊँची पहाड़ी पर रखा, जहाँ से उन्होंने पूरा युद्ध देखा।
प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में वे “श्याम” नाम से पूजे जाएँगे और जो भी सच्चे मन से उनका नाम लेगा, उसके कष्ट दूर होंगे। लोक मान्यता के अनुसार बाद में उनका शीश खाटू की भूमि में मिला, और वहीं मंदिर बना।
खाटू श्याम मंदिर (खाटू धाम)
खाटू धाम जयपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर सीकर ज़िले में है। मंदिर में बाबा के शीश की पूजा होती है, जिसका शृंगार रोज़ बदला जाता है। मंदिर के पास श्याम कुंड है, जहाँ स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। रींगस से खाटू तक लगभग 17 किलोमीटर की पैदल यात्रा, हाथ में निशान (ध्वज) लेकर, भक्तों की सबसे बड़ी परंपरा है।
फाल्गुन मेला और जन्मोत्सव
- फाल्गुन लक्खी मेला: फाल्गुन शुक्ल पक्ष में कई दिन चलने वाला मेला, जिसका मुख्य दिन फाल्गुन शुक्ल एकादशी (द्वादशी) है। इसके बाद फाल्गुन पूर्णिमा और होली आती है।
- श्याम जन्मोत्सव: कार्तिक शुक्ल एकादशी – यानी देवउठनी एकादशी – को बाबा का जन्मदिन मनाया जाता है।
- हर महीने की शुक्ल एकादशी को भी मंदिर में विशेष भीड़ रहती है।
खाटू श्याम जी की पूजा विधि
- सुबह स्नान कर साफ़ कपड़े पहनें और बाबा की तस्वीर या मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएँ।
- बाबा को गुलाब या गेंदे की माला, इत्र और मोरपंख अर्पित करें।
- चूरमा, खीर या कच्चे दूध का भोग लगाएँ और पान चढ़ाएँ।
- “ॐ श्री श्याम देवाय नमः” मंत्र का जाप करें, फिर खाटू श्याम चालीसा पढ़ें।
- अंत में खाटू श्याम जी की आरती करें और “जय श्री श्याम” का जयकारा लगाएँ।
एकादशी के दिन व्रत रखकर शाम को भजन-कीर्तन करना श्याम भक्तों में बहुत प्रचलित है। बाबा के भजनों की परंपरा इतनी समृद्ध है कि हर शहर में “श्याम संध्या” और “जागरण” होते हैं।
खाटू श्याम और श्रीकृष्ण का संबंध
खाटू श्याम की पूजा श्रीकृष्ण के ही एक रूप में होती है, इसलिए उनका शृंगार भी कृष्ण जैसा – मोरमुकुट और पीतांबर – किया जाता है। फिर भी उनकी अपनी कथा, अपना धाम और अपनी भजन परंपरा है। भगवान कृष्ण के बारे में विस्तार से जानने के लिए भगवान कृष्ण का पेज देखें।
खाटू कैसे पहुँचें
सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन रींगस (लगभग 17 किमी) है। जयपुर हवाई अड्डा लगभग 95 किमी दूर है। जयपुर और सीकर से खाटू के लिए सीधी बसें और टैक्सी मिलती हैं। मेले के दिनों में भीड़ बहुत रहती है, इसलिए दर्शन के लिए सुबह जल्दी पहुँचना अच्छा रहता है।