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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas
भगवान विश्वकर्मा

भगवान विश्वकर्मा

Lord Vishwakarma

विश्वकर्मा जी का मूल मंत्र

ॐ विश्वकर्मणे नमः

विश्वकर्मा जी की आरती

विश्वकर्मा जी के व्रत और त्योहार

भगवान विश्वकर्मा – परिचय

भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के दिव्य शिल्पकार और देवताओं के वास्तुकार (इंजीनियर) हैं। ऋग्वेद में उन्हें पूरी सृष्टि को रचने वाला कहा गया है, और पुराणों में वे देवताओं के महल, नगर, रथ और अस्त्र बनाने वाले देवशिल्पी हैं। कारीगर, इंजीनियर, बढ़ई, लोहार, मिस्त्री, मशीन चलाने वाले और कारख़ानों में काम करने वाले लोग उन्हें अपना आराध्य मानते हैं। हर साल विश्वकर्मा पूजा पर औज़ारों और मशीनों की पूजा की जाती है।

विश्वकर्मा की बनाई दिव्य रचनाएँ

पुराणों और महाकाव्यों में विश्वकर्मा की कई अद्भुत रचनाओं का वर्णन है:

  • स्वर्ण लंका – जो पहले कुबेर की नगरी थी और बाद में रावण ने छीन ली।
  • द्वारका – भगवान श्रीकृष्ण की नगरी, जो एक ही रात में समुद्र के बीच बनाई गई।
  • इंद्रप्रस्थ – पांडवों की राजधानी (मयासुर के साथ), और इंद्र की अमरावती पुरी।
  • पुष्पक विमान – जो इच्छा के अनुसार उड़ता था।
  • दिव्य अस्त्र – ऋषि दधीचि की हड्डियों से इंद्र का वज्र, शिव का त्रिशूल और पिनाक धनुष, विष्णु का सुदर्शन चक्र (कुछ कथाओं में)।
  • जगन्नाथ की मूर्तियाँ – कथा के अनुसार बूढ़े कारीगर के रूप में आकर उन्होंने ही भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियाँ बनाईं।

सूर्य के तेज की कथा

विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा का विवाह सूर्य देव से हुआ था। सूर्य का तेज इतना प्रचंड था कि संज्ञा उसे सह न सकीं। तब विश्वकर्मा ने सूर्य को अपनी खराद (मशीन) पर चढ़ाकर उनके तेज का एक हिस्सा तराश दिया। उसी तराशे गए तेज से उन्होंने सुदर्शन चक्र, त्रिशूल और अन्य दिव्य अस्त्र बनाए। सूर्य देव के बारे में भी पढ़ें।

रामायण में राम सेतु बनाने वाले वानर नल भी विश्वकर्मा के पुत्र माने जाते हैं, जिन्हें पिता से निर्माण की कला मिली थी।

विश्वकर्मा पूजा कब होती है

उत्तर और पूर्व भारत में विश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रांति के दिन होती है, जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है। सौर गणना पर आधारित होने के कारण यह लगभग हर साल 17 सितंबर (कभी-कभी 16 या 18) को पड़ती है। कुछ जगह दीपावली के अगले दिन (गोवर्धन पूजा पर) भी औज़ारों की पूजा की जाती है।

विश्वकर्मा पूजा विधि

  1. पूजा से पहले कारख़ाना, दुकान, वर्कशॉप या घर के औज़ार और मशीनें साफ़ करें।
  2. चौकी पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र रखें और कलश स्थापित करें।
  3. औज़ारों और मशीनों पर रोली, हल्दी, अक्षत और फूल चढ़ाएँ।
  4. फल, मिठाई और पंचामृत का भोग लगाएँ और “ॐ विश्वकर्मणे नमः” मंत्र का जाप करें।
  5. विश्वकर्मा जी की आरती करें और प्रसाद बाँटें।
  6. परंपरा के अनुसार पूजा के दिन मशीनें और औज़ार नहीं चलाए जाते – उन्हें विश्राम दिया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भगवान विश्वकर्मा कौन हैं?
भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के दिव्य शिल्पकार और देवताओं के वास्तुकार हैं। उन्होंने द्वारका, लंका, इंद्रप्रस्थ, पुष्पक विमान और देवताओं के अस्त्र बनाए।
विश्वकर्मा पूजा कब मनाई जाती है?
विश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रांति को होती है, जो आमतौर पर 17 सितंबर को पड़ती है।
विश्वकर्मा पूजा में क्या पूजा जाता है?
इस दिन भगवान विश्वकर्मा के साथ औज़ारों, मशीनों, वाहनों और कारख़ानों की पूजा की जाती है, और उस दिन उन्हें चलाया नहीं जाता।
विश्वकर्मा का मंत्र क्या है?
भगवान विश्वकर्मा का सरल मंत्र "ॐ विश्वकर्मणे नमः" है।
विश्वकर्मा की पुत्री कौन थीं?
विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा थीं, जिनका विवाह सूर्य देव से हुआ। यमराज, यमुना और शनि (छाया से) सूर्य की संतानें हैं।

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