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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas
भगवान जगन्नाथ

भगवान जगन्नाथ

Lord Jagannath

जगन्नाथ जी का मूल मंत्र

ॐ जगन्नाथाय नमः

जगन्नाथ स्वामी नयनपथगामी भवतु मे

जगन्नाथ जी की आरती

जगन्नाथ चालीसा

जगन्नाथ जी के भजन

जगन्नाथ जी के व्रत और त्योहार

जगन्नाथ जी के प्रसिद्ध मंदिर

भगवान जगन्नाथ – परिचय

भगवान जगन्नाथ यानी “जगत के नाथ” – ओडिशा के पुरी धाम में अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं। उन्हें भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का स्वरूप माना जाता है। पुरी चार धामों में से एक है, और यहाँ की रथ यात्रा दुनिया का सबसे बड़ा रथ उत्सव है, जिसमें भगवान स्वयं मंदिर से निकलकर भक्तों के बीच आते हैं। जगन्नाथ जी की बड़ी गोल आँखों वाली लकड़ी की मूर्तियाँ हिंदू मूर्तिकला में अनोखी हैं।

अधूरी मूर्तियों की कथा

स्कंद पुराण की कथा के अनुसार मालवा के राजा इंद्रद्युम्न को भगवान ने स्वप्न में आदेश दिया कि समुद्र में बहकर आने वाले पवित्र लकड़ी के लट्ठे (दारु) से उनकी मूर्ति बनवाएँ। मूर्ति बनाने के लिए एक बूढ़े कारीगर के रूप में स्वयं विश्वकर्मा (कुछ कथाओं में भगवान) आए। उन्होंने शर्त रखी कि इक्कीस दिन तक कोई कमरे का दरवाज़ा नहीं खोलेगा।

कुछ दिनों बाद अंदर से आवाज़ आना बंद हो गई। रानी की चिंता पर राजा ने समय से पहले दरवाज़ा खोल दिया। कारीगर गायब था और मूर्तियाँ अधूरी थीं – हाथ-पैर पूरे नहीं बने थे। राजा दुखी हुए, पर भगवान ने कहा कि वे इसी रूप में पूजे जाना चाहते हैं। इसीलिए आज भी जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियाँ इसी अनोखे रूप में हैं। इस स्वरूप को दारुब्रह्म कहा जाता है।

नवकलेवर – मूर्तियों का नया शरीर

जगन्नाथ जी की मूर्तियाँ नीम की लकड़ी से बनती हैं। जिस वर्ष आषाढ़ में अधिक मास पड़ता है (लगभग 12 से 19 साल में), तब नवकलेवर होता है – नई मूर्तियाँ बनाकर पुरानी मूर्तियों का “ब्रह्म पदार्थ” गुप्त विधि से नई मूर्ति में स्थापित किया जाता है। यह प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय रहती है।

रथ यात्रा

आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जगन्नाथ रथ यात्रा निकलती है। तीनों भाई-बहन अलग-अलग विशाल लकड़ी के रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर (मौसी का घर) जाते हैं:

  • नंदीघोष – जगन्नाथ जी का रथ, 16 पहिए।
  • तालध्वज – बलभद्र जी का रथ, 14 पहिए।
  • दर्पदलन – सुभद्रा जी का रथ, 12 पहिए।

हर साल नए रथ बनते हैं। पुरी के राजा सोने की झाड़ू से रथ के आगे सफ़ाई करते हैं (छेरा पहरा), जो बताता है कि भगवान के सामने राजा भी सेवक है। सात दिन बाद “बाहुड़ा यात्रा” में भगवान वापस लौटते हैं। रथ यात्रा से पहले ज्येष्ठ पूर्णिमा को स्नान यात्रा होती है, जिसके बाद भगवान 15 दिन “बीमार” रहते हैं (अनवसर) और दर्शन नहीं होते।

महाप्रसाद

जगन्नाथ मंदिर की रसोई दुनिया की सबसे बड़ी मंदिर रसोई मानी जाती है। मिट्टी के बर्तनों में लकड़ी की आग पर रोज़ 56 भोग बनते हैं। भगवान को अर्पित होने के बाद यह “महाप्रसाद” कहलाता है और आनंद बाज़ार में मिलता है। यहाँ जाति-भेद के बिना सब साथ बैठकर महाप्रसाद ग्रहण करते हैं।

पूजा विधि

  1. जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की तस्वीर के सामने दीपक जलाएँ।
  2. तुलसी दल, फूल, चंदन और अक्षत अर्पित करें।
  3. खिचड़ी या मीठे का भोग लगाएँ और “ॐ जगन्नाथाय नमः” का जाप करें।
  4. जगन्नाथ चालीसा पढ़ें और जगन्नाथ जी की आरती करें। “जगन्नाथाष्टकम्” का पाठ भी बहुत प्रिय है।

भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण के बारे में भी पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जगन्नाथ मंदिर कहाँ है?
श्री जगन्नाथ मंदिर ओडिशा के पुरी शहर में है। यह हिंदू धर्म के चार धामों में से एक है।
जगन्नाथ जी की मूर्ति अधूरी क्यों है?
कथा के अनुसार मूर्ति बनाने वाले कारीगर ने इक्कीस दिन तक दरवाज़ा न खोलने की शर्त रखी थी। राजा इंद्रद्युम्न ने समय से पहले दरवाज़ा खोल दिया, इसलिए मूर्तियाँ अधूरी रह गईं और भगवान ने इसी रूप में पूजे जाने की इच्छा जताई।
जगन्नाथ रथ यात्रा कब निकलती है?
जगन्नाथ रथ यात्रा हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को निकलती है।
जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों के नाम क्या हैं?
जगन्नाथ जी का रथ नंदीघोष, बलभद्र जी का तालध्वज और सुभद्रा जी का दर्पदलन कहलाता है।
नवकलेवर क्या है?
जिस साल आषाढ़ में अधिक मास पड़ता है, तब जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की नीम की लकड़ी की नई मूर्तियाँ बनाई जाती हैं। इसे नवकलेवर (नया शरीर) कहते हैं।

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