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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas
शनि देव

शनि देव

Lord Shani

शनि देव जी का मूल मंत्र

ॐ शं शनैश्चराय नमः

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

शनि देव जी की आरती

शनि देव चालीसा

शनि देव मंत्र

शनि देव स्तोत्र और स्तुति

शनि देव जी के भजन

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शनि देव जी के व्रत और त्योहार

शनि देव – परिचय

शनि देव नवग्रहों में से एक और न्याय के देवता हैं। उन्हें कर्मफल दाता कहा जाता है – यानी वे हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। लोग अक्सर शनि से डरते हैं, पर शास्त्रों में शनि को कठोर शिक्षक माना गया है, क्रूर नहीं। जो व्यक्ति ईमानदारी, मेहनत और दूसरों की सेवा करता है, उस पर शनि की कृपा रहती है। शनिवार उनका दिन है।

शनि देव का जन्म और परिवार

शनि देव सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं। कथा के अनुसार सूर्य की पत्नी संज्ञा उनका तेज सहन न कर सकीं और अपनी छाया को उनके पास छोड़कर तप करने चली गईं। छाया के गर्भ से शनि का जन्म हुआ। उनका रंग श्याम था, इसलिए सूर्य ने उन्हें अपना पुत्र मानने में संदेह किया। इससे पिता-पुत्र में मतभेद रहा, जिसके कारण ज्योतिष में सूर्य और शनि को शत्रु ग्रह माना जाता है। यमराज और यमुना शनि के भाई-बहन हैं। सूर्य देव के बारे में और पढ़ें।

शनि की दृष्टि और ज्योतिष में शनि

ज्योतिष में शनि सबसे धीमी चाल वाला ग्रह है – एक राशि में लगभग ढाई साल रहता है, इसलिए उसे “मंद” और “शनैश्चर” (धीरे चलने वाला) कहते हैं। चंद्र राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में शनि के गोचर को साढ़ेसाती (लगभग साढ़े सात साल) और चौथे-आठवें भाव के गोचर को ढैय्या कहा जाता है। यह समय मेहनत, धैर्य और अनुशासन की परीक्षा का माना जाता है। हर व्यक्ति पर इसका असर अलग होता है, इसलिए कुंडली दिखाकर ही निष्कर्ष निकालें।

शनि और हनुमान जी की कथा

एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार हनुमान जी ने शनि देव को रावण की कैद से मुक्त कराया था (एक अन्य कथा में हनुमान जी ने अहंकारी शनि को सबक सिखाया)। तब शनि ने वचन दिया कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे वे कष्ट नहीं देंगे। इसीलिए शनिवार को हनुमान जी की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ शनि दोष में लाभकारी माना जाता है।

शनिवार की पूजा विधि

  1. शनिवार को सुबह स्नान कर काले या नीले वस्त्र पहनें।
  2. पीपल के पेड़ या शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
  3. शनि देव की प्रतिमा पर सरसों का तेल चढ़ाएँ – ध्यान रखें कि मूर्ति की आँखों में सीधे न देखें, चरणों की ओर देखकर पूजा करें।
  4. काले तिल, उड़द और नीले फूल अर्पित करें।
  5. “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का 108 बार जाप करें, फिर शनि चालीसा पढ़ें और शनिदेव की आरती करें।

शनि को प्रसन्न करने के सरल उपाय

  • शनिवार को ज़रूरतमंदों को काले तिल, उड़द, कंबल, जूते या तेल का दान करें।
  • मज़दूरों, बुज़ुर्गों और सफ़ाईकर्मियों का सम्मान और सहायता करें – शनि सेवा से प्रसन्न होते हैं।
  • शराब, झूठ और दूसरों को सताने से बचें।
  • शनिवार को पीपल की परिक्रमा और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • राजा दशरथ का रचा शनि मंत्र और शनि स्तोत्र पढ़ें।

शनि जयंती और प्रसिद्ध मंदिर

शनि जयंती ज्येष्ठ अमावस्या को मनाई जाती है। महाराष्ट्र का शनि शिंगणापुर सबसे प्रसिद्ध शनि धाम है, जहाँ खुले आसमान के नीचे काले पत्थर के रूप में शनि देव विराजते हैं। दिल्ली का शनि धाम, मथुरा के पास कोकिलावन और मध्य प्रदेश का शनिश्चरा मंदिर (मुरैना) भी प्रसिद्ध हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शनि देव किसके पुत्र हैं?
शनि देव सूर्य देव और छाया के पुत्र हैं। यमराज और यमुना उनके भाई-बहन हैं।
शनि देव को कौन सा तेल चढ़ाया जाता है?
शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाया जाता है। शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।
शनि का मूल मंत्र क्या है?
शनि का मूल मंत्र "ॐ शं शनैश्चराय नमः" है। बीज मंत्र "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" है। शनिवार को इसका 108 बार जाप किया जाता है।
साढ़ेसाती क्या होती है?
जब शनि चंद्र राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव से गुज़रता है, उस लगभग साढ़े सात साल के समय को साढ़ेसाती कहते हैं। इसका असर हर कुंडली में अलग होता है।
शनि दोष में हनुमान जी की पूजा क्यों करते हैं?
मान्यता है कि हनुमान जी ने शनि देव को रावण की कैद से छुड़ाया था, और शनि ने वचन दिया कि वे हनुमान भक्तों को कष्ट नहीं देंगे। इसलिए शनिवार को हनुमान चालीसा पढ़ी जाती है।
शनि जयंती कब होती है?
शनि जयंती हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाई जाती है।

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