प्यारो घणो लागे जी नारायण
प्यारो घणो लागे जी नारायण थांको मालासेरी दरबार, मंदिरिया के आजु बाजू सरोवर भरिया हजार,ऊँची ऊँची लहरें चाले ,ठण्डी चाले फुवांर॥ प्यारो….. भांत भांत का रुक भरकड़ा पायो नही कोई पार,कोयल मोर पपहिया बोले, बोले...
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प्यारो घणो लागे जी नारायण थांको मालासेरी दरबार, मंदिरिया के आजु बाजू सरोवर भरिया हजार,ऊँची ऊँची लहरें चाले ,ठण्डी चाले फुवांर॥ प्यारो….. भांत भांत का रुक भरकड़ा पायो नही कोई पार,कोयल मोर पपहिया बोले, बोले...
धन तो धणी छ रे धन भाग रे,श्री म्हारा अब तो आजो जी म्हारे पावणा, घर का तो रूसिया माई बाप रे,श्री जी म्हारा अपणा देवे है म्हाने बोल रे,धन तो धणी छ रे धन...
देव धणी को मन्दिर प्यारो , मालासेरी गाँव जी,साडू मां का लाल थांको , जग में मोटो नाम जी.जय जय गूंजे जी जयकारों थारा नाम को. माह महीना में आप पधारिया , थावर रूड़ो वार...
नाम तुम्हारा तारनहारा,कब तेरा दर्शन होगा,जिस की रचना इतनी सुंदर वो कितना सुंदर होगा सुर नर मुनि जन तुम निष् दिन शीश निभाते है,जो गाते है तेरी महिमा मन वांचित फल पाते है,धन्ये घडी समजू...
उलझनों की ये सुलझे लड़ीतू राम भजले, ओ श्याम भजलेतू नाम भजले घड़ी दो घड़ी" नाम सुमिरन का धन साथ देगा,जगकी माया क्या कब रूठ जाए।एक पल का भरोसा नहीं है,सांसों का तार ना कब...
हे गोविन्द हे गोपाल अब तो जीवन हारे ।अब तो जीवन हारे प्रभु शरण है तिहारे… हे गोविंद ॥ नीर पीवण हेतु गयो सिन्धू के किनारेसिन्धू के बीच बसत ग्राह चरण ले पधारेहे गोविन्द हे...
मेरा छोटा सा संसार,हरि आ जाओ एक बार ।हरि आ जाओ हरि आ जाओ,मेरी बिगड़ी आज बना जाओ ॥मेरा छोटा सा संसार…. लाखों को दरश दिखाया है,प्रभु मुझको क्यों तरसाया है ।ये कैसी तुम्हारी माया...
नारायण नारायण नारायण,भजले घडी दो घड़ी नायरण,ये नाम बड़ा अनमोल बड़े मीठे इसके बोल,नारायण नारायण नारायण…. ये जीवन की सचाई है मोह माया काम ना आइए है,तूने पाप किये या पुण्य किये बस येही तेरी...
छोरिया म्हारी गाओ ये बजाओ गढ़ की गुजरियाम्हारा नारायण का गाओ मंगला चार ,,,म्हारे देव पधारिया पावणा ॥ थाने धन्य धन्य म्हारी मालासेरी डुंगरिया ।वठे जन्मिया जन्मिया त्रिलोकी का नाथ ॥नारायण आया पावणा…… सैया मारी...
ब्रह्मादी देवो द्वारा स्तुति - रामचरितमानस से शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं,विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनं योगिभिध्यार्नगम्यम्,वंदे विष्णुम् भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्, जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता,गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिंधुसुता प्रिय कंता,पालन सुर धरनी...
मन तड़पत हरि दरशन को आज ॥मोरे तुम बिन बिगड़े सकल काज ।आ विनती करत हूँ रखियो लाज ॥ तुम्हरे द्वार का मैं हूँ जोगीमेरी ओर नजर कब होगीसुन मेरे व्याकुल मन की बात ॥...
कहां छुपा बैठा है अब तक वह सच्चा इंसान,खोजते जिसे स्वयं भगवान, जिसने रूखा सूखा खाया ,पर न कहीं ईमान गवाया ,उसने ही यह भोग लगाया ,जिसे राम ने रूचि से खाया ,स्वार्थ रहित सेवा...